कुछ तो मानो तुम भी
जिद ना ठानो तुम भी
क्यूं कर रहे ऐसा
जो चाहते हो वो ना कर पाओगे
सबकुछ मिला तो था
कोई गिला ना था
उस भीड़ में अपना इक मकान भी तो था
उसे घर ना बनाया तुमने
उसमें दिल न बसाया तुमने
अपना हीं चलाया तुमने
रिश्ता ना निभाया तुमने
जब लौटना ना तुमको
तो क्यूं वापस आते हो
जो दिल में ना रखना
तो मकान क्या होगा
जब घर ना बसा पाओगे
दिल ना लगा पाओगे
तो लगान क्या होगा
अब सोच लो तुम भी
जब लौटना चाहोगे
बड़ी देर कर दोगे
ढूंढ ना पाओगे
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