उठ जाओ नारी तुम
कब तक सोते रहोगे।
अपने आप को तुम तो
कितना मार के जीयोगे।||१||
दुनिया क्या बोलेगा
खुद को थोड़ा देखो तुम।
कबतक मर के जियेगी अबतो खुद जियो
तुम।||२||
दुनिया तो एक खेल है
कबतक खेलते रहोगे,
अपने आपको तुम तो कितना तोड़के जीयोगे।||३||
अबतो उठ जाओ तुम कुछ तो कर दिखाओ तुम ।
अपने मन के बात को, अबतो कर दिखाओ तुम।||४||
समाज तो
कुछ बोलेगा अपना मन तोड़ेगा,तुम ना सुनो उनके बात।
अबतो उठ जाओ तुम कुछ तो कर दिखाओ तुम।||५||
-हिमेश कुमार बारीक्
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