चुनावी मौसम आया, वादों की बरसात,
गली-गली में होने लगी, नेताओं की बात।
कल तक जो पहचानते न थे, आज बने हमदर्द,
वोटों की खातिर बदल गए, उनके सारे दर्द।
हाथ जोड़कर द्वार-द्वार पर, करते हैं प्रणाम,
मतदाता को अपना कहकर, लेते हैं हर नाम।
कहीं विकास के सपने हैं, कहीं योजनाओं की बात,
हर चौखट पर सुनने को मिलती, मीठी-मीठी बात।
चाय की प्याली संग होती, राजनीति की चर्चा,
किसे मिलेगा वोट—यही है, सबसे बड़ी मशक्कत।
मतदाता भी सजग हुआ है, रखता पूरा हिसाब,
पाँच बरस के कर्मों का अब, देता सही जवाब।
न जाति-धर्म के मोह में बहें, न लालच में आएँ,
सोच-समझकर अपने मत का, सच्चा मोल चुकाएँ।
वोट हमारा अधिकार है, वोट हमारी शान,
एक-एक मत से बनता है, देश का नया विधान।
नेता चाहे जितनी कर लें, वोटों की मशक्कत,
जनता के जागे मत से ही, बदलेगी यह हुकूमत।
सोच-समझकर बटन दबाएँ, रखें देश का मान,
सजग नागरिक के हाथों में, लोकतंत्र की जान।
वोट पड़े जब योग्य हाथ में, तभी बने विकास,
मत की ताकत से ही होगा, भारत का उजास।
-अतिशा माथुर
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