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" कुछ ख़्वाब उम्र भर साथ चलते हैं”

                
                                                         
                            और जब ज़िंदगी के आख़िरी छोर पर
                                                                 
                            
कोई मुझसे पूछेगा—
“मोहित, ताउम्र क्या किया तुमने?”

तो शायद मैं मुस्कुराकर कहूँगा—

“एक ख़्वाब से प्रेम किया था…”

उस ख़्वाब से,
जिसका नाम UPPCS था।

किताबों के पन्नों में उसे ढूँढ़ा,
रातों की तन्हाई में उसे जिया,
असफलताओं के बाद भी
हर सुबह उसी के लिए उठता रहा।

कभी लगा बहुत दूर है,
कभी लगा बस अब मिल ही जाएगा…
लेकिन मैंने चलना नहीं छोड़ा।

फिर कोई पूछेगा—
“क्या वो ख़्वाब तुम्हें मिला?”

मैं शायद कहूँगा—

“मिला या नहीं, ये तो वक़्त बताएगा…
लेकिन उसे पाने की कोशिश में
मैं वो मोहित बन गया,
जिसे देखकर मुझे खुद पर गर्व होगा।”

क्योंकि कुछ ख़्वाब
सिर्फ़ हासिल करने के लिए नहीं होते,
वे हमें बेहतर इंसान बनाने के लिए भी आते हैं। 
— मोहित 
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42 मिनट पहले

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