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बड़े इल्जाम लगाते हैं दुनिया मौका देखती है

                
                                                         
                            शिकायतों की दुनिया है गुजारिशों का मेला है
                                                                 
                            
वक्त़ की पुकार तू हर राह में अकेला है

वक्त है खराब पर नसीब नहीं है
क्या कहेंगे लोग सोचना नहीं है
यहां हर कोई शिकवा लेकर खड़ा है
जिंदगी के इस सफ़र से मुकरना नहीं है

तख्त ए ताज की चाह नहीं है
झूठे दिखावे का कोई लिबास नहीं है
लिबास देखती है दुनिया मन नहीं
इसीलिए तो किसी का किसी पर विश्वास नहीं है

बड़े इल्जाम लगाते हैं दुनिया मौका देखती है
उम्र कम देती है जिंदगी इम्तिहान ज्यादा लेती है
जीवन के सफर में एक तलाश और है मौके की
एहसान कम और कमियां ज्यादा दिखती हैं
-अर्ली गीत
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
8 घंटे पहले

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