*कर्मों से मिली इज्जत,
भाग्य में मिली किस्मत।
हमारी नहीं है, कोई कीमत,
सबकी करते हैं, खिदमत।*
-रमन सिंह गोठवाल
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X