🌱❤️ ग़ज़ल ❤️🌱
स्वरचित-- राकेश कुमार तिवारी
24/09/2026
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रास्ता कुछ करीब हो जाता
दर्द सहना अजीब हो जाता।
यूं ही तकता जो तेरी राहों को
तू कभी तो नसीब हो जाता।
दीद होती जो तेरे चेहरे की
दिल को सजदा नसीब हो जाता।
जो संवार देता जुल्फें तेरी
बा - खुदा मैं हबीब हो जाता।
तू अगर हाल - ए - दिल समझ लेता
चोट का ख़ुद तरीक हो जाता।।
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