तू जिधर चल, बस निडर चल।
तू चल बस, तू अड़ बस,
तू रुक ना, तू झुक ना।
तू चल बस, मंज़िल की ना तलाश रख,
बस रास्ते की ही प्यास रख।
धरती पे चल, आसमाँ की आस रख,
चल तू बिना किसी सहारे,
बिना किसी उजियारे,
बस खुद को तू पास रख।
मिल जाएगा सब तुझे जिसकी है आस तुझे,
बस रब को तू ख़ास रख।
तू जिधर चल, बस निडर चल।
गूँगे, बहरे की भाँति चल,
ना जग की रीति में ढल।
हो धरती पे अँधेरा जब,
तब तू सूरज के पास जल।
मगर तू चल, हर हाल चल,
तू चल, बस निडर चल।
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