मुशाफिर हूँ दिल लगाकर चला जाऊँगा,
जिस दिन जाना होगा रुला जाऊँगा।
तुम उपहार में धधकता हुआ सूरज मांगती हो,
एक बार चाँद मांगकर देखो दिला जाऊँगा।
लड़के लड़कियाँ सपने देखते हैं कामयाबी के,
जब जाना होगा उनको कामयाबी दिला जाऊँगा।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X