"मेरा संघर्ष मेरा श्रृंगार"
मैं संघर्ष के साथ श्रृंगार भी
करूंगी, मुझे हाथों में
कलम के साथ चूड़ियां भी
पसंद है।
आगे बढ़ते हुए इन कदमों
में मुझे पायल की आवाज
पसंद है,
आंखों में ख्वाबों के साथ मुझे
काजल लगाना भी पसंद
है। माथे पर पढ़ते शिकनों
के बीच बिंदी लगाना
अच्छा लगता है। मुझे
अपने सपनों के साथ
सजना, सवरना भी अच्छा
लगता है, इस नए जमाने में
भी मुझे सादगी अच्छा
लगता है।
~तनु सिन्हा
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