जीवन की कुछ यादें हैं
जो इतनी उलझायेगी
पता नहीं पता नहीं
कुछ यादें ऐसी भी हैं
भूलें भूल नहीं पाते हैं
भूलनें का प्रयास करें तो
ग़म में डूब जाते हैं
ये यादें उलझाई हुई
याद हमें यह जायेगी
जहां कहीं भी जायेंगे तो
थोड़ी मोड़ी खुशियों के संग
ग़म की आंधी जायेगी
- कुंवर जितेन्द्र सिंह
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