राम धरै कर सीस सदा, जगदीश करै तुम्हरी रखवारी |
बंधन दूरि करै हनुमान व क्रंदन दूरि करै त्रिपुरारी |
गेह अपार भरै धन - धान्य, व वंश बढै नित होय सुखारी |
'मानस' प्रेम रहै सब मा, कर जोरि प्रभू यह अर्ज हमारी ||
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