मैं सोच में पड़ जाता हूं, अब मुझे कैसे क्या है करना।
मुझे बस घर से रोज निकलना, खाली खाली सा दिखता है घर अपना।
अभी तो मैं ख़ुद अधूरा अधूरा सा हूं, मुझे बहुत कुछ है अभी सीखना।
वजूद सबका अपना अपना है, मुझे भी अपना एक मुकाम हासिल है करना।
वो लगाकर सब अपनी अपनी उम्मीद मुझसे रखते है, मैं सोच पड़ जाता हूं, मुझे कैसे क्या है करना।
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