"क्यों न हो प्यार"
क्यों न करे कोई मोहब्बत मुझसे,
जब मेरी सादगी ही एक मिसाल है।
जमाने की इस भीड़ में जहाँ सब
पत्थर हैं, वहाँ मेरा निश्चल दिल बेमिसाल है।
लोग ढूँढ़ते हैं हुस्न और रुतबा जहाँ,
वहाँ मेरी जिम्मेदारियाँ ही मेरा गहना है।
जो सबसे आँसू पोंछकर खुद चुप रह
जाए, उस पवित्र रूह के करीब तो हर
किसी को रहना है। मैं महज़ फर्ज़ की
कोई बंदिश नहीं, मैं तो वो मोती हूँ,
जिसे सीप में छुपाकर रखना है।
जो मेरे जख्मों को छूकर अपनी
इबादत समझ सके वो भी किसी कोहिनूर
से कम नहीं।
~तनु सिन्हा
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