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ख्वाब मे ही सही...

                
                                                         
                            ख्वाब में ही सही, तुम्हारी तस्वीर बनाई है,
                                                                 
                            
बातों में ही सही, तुम्हें अपना बनाया है।
अंजान राहों में भी तुम्हें अपना संगिनी बनाया,
तो भला तुमसे जुदा कैसे हो सकता हूँ?
तुमसे मिलना शायद किस्मत में न था,
पर तुम्हें चाहना मेरे बस में था।
तुम पास नहीं, फिर भी एहसास में हो,
मेरी हर खामोशी के आसपास में हो।
रिश्ते हमेशा नाम के मोहताज नहीं होते,
कुछ रिश्ते सिर्फ एहसास से मुकम्मल होते हैं।
तुम मेरी कहानी का वो हिस्सा हो,
जिसे भूलना चाहूँ भी तो..
मेरे ख्वाब मुझे भूलने नहीं देती....!!!
-संजय श्रीवास्तव
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38 मिनट पहले

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