जाने मैं क्या कहना चाहूं
जाने तुम क्या सुनना चाहो
ये ख़ामोशी ऐसे ही है
तुम मुझे आज जो समझे हो
मैं तुम्हें आज जो जानता हूं
सब बीत जाएगा ये भी मगर
बस कुछ यादें रह जाती हैं
बस कुछ सपने रह जाते हैं
जाने तुम याद करो फिर क्या
जाने मैं क्या सपने देखूं
- मृदुल
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