मुझे पता है कि गंगा नदी
चलकर मेरे पास कभी नहीं आएगी
इंतजार नहीं करेगी और बह जाएगी
इसलिए मैं ही आ गया प्रयागराज
क्योंकि पता है
ना मना करेगी आने से,
ना दूर भगाएगी
सब बातें सुनेगी तबियत से
और अपना हाल बतायेगी।
जब तक चाहूं तब तक रुकूं
ये ना आपत्ति जताएगी
ना शोक मनाएगी
विदा लिया तो आने का वादा मैने ही किया
क्योंकि ये बह जाएगी
और मुझ तक चलकर कभी नहीं आएगी।
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