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हे इंसान इतना गुरूर न कर

                
                                                         
                            हे इंसान इतना गुरूर न कर,
                                                                 
                            
ये सिर्फ दो दिन का स्वप्न है जनाब,
गुरूर पल भर का है मोहताज,
दर्पण की तरह चमकता है,
काँच की तरह पल भर में,
चकना चूर हो जाता है मिनटों में,
कुछ नहीं रहता अपने पास,
बस रह जाता है अपनी दीनता,
तभी तो, हे इंसान गुरूर छोड़,
नम्रता का रास्ता अपना।
-आकांक्षा गुप्ता
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50 मिनट पहले

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