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गुरु वही जो जीना सिखाए

                
                                                         
                            गुरु वही जो जीना सिखाए
                                                                 
                            

विश्वामित्र ने राम को देखा,
केवल राजकुमार नहीं।
शस्त्र चलाना ही सब कुछ हो,
इतना उनका ज्ञान नहीं॥

वन की राहों ने सिखलाया,
शक्ति कहाँ उपयोग में आए।
ज्ञान वही जो राह बनाए,
गुरु वही जो जीना सिखाए॥

द्रोण खड़े जब धनुष थमाकर,
लक्ष्य सभी को एक दिखाएँ।
सबने देखा वृक्ष और डाली,
अर्जुन केवल आँख बताएँ॥

एकाग्रता जब लक्ष्य बने तो,
दृष्टि स्वयं मंज़िल तक जाए।
ज्ञान वही जो राह बनाए,
गुरु वही जो जीना सिखाए॥

सांदीपनि के आश्रम में भी,
कृष्ण स्वयं जब शिष्य बने।
जिनको जग ने ईश्वर माना,
वे भी गुरु के सम्मुख झुके॥

ज्ञान बड़ा हो जितना चाहे,
विनय उसे ऊँचाई दिलाए।
ज्ञान वही जो राह बनाए,
गुरु वही जो जीना सिखाए॥

अपमानों की आग मिली तो,
चाणक्य ने संकल्प उठाया।
राजमहल से दूर खड़े हो,
चंद्रगुप्त को योग्य बनाया॥

सिंहासन से पहले गुरु ने,
शिष्य में सम्राट दिखाए।
ज्ञान वही जो राह बनाए,
गुरु वही जो जीना सिखाए॥

बंद मिले जब ज्ञान के द्वारे,
सावित्री ने राह बनाई।
बेटियों के हाथ किताबें देकर,
शिक्षा की वह लौ जगमगाई॥

ज्ञान किसी का बंधक कब है,
शिक्षा सबका हक़ बन जाए।
ज्ञान वही जो राह बनाए,
गुरु वही जो जीना सिखाए॥

रामकृष्ण ने नरेंद्र में भी,
एक प्रखर संभावना जानी।
प्रश्नों को रोका नहीं कभी,
खोज बनी उसकी ज़िंदगानी॥

वही नरेंद्र विवेकानंद बन,
भारत की आवाज़ उठाए।
ज्ञान वही जो राह बनाए,
गुरु वही जो जीना सिखाए॥

राधाकृष्णन कक्षा से निकले,
राष्ट्र-शिखर तक नाम गया।
पद से बढ़कर शिक्षक होना,
उनका सच्चा मान रहा॥

जन्मदिवस भी जिसने अपना,
शिक्षक के सम्मान लगाया।
ज्ञान वही जो राह बनाए,
गुरु वही जो जीना सिखाए॥

आसमानों को छूकर भी तो,
कक्षा से कलाम का नाता।
युवा मनों में स्वप्न जगाकर,
भविष्य से था उनका नाता II

सपना केवल नींद नहीं है,
कर्म उसे मंज़िल तक लाए।
ज्ञान वही जो राह बनाए,
गुरु वही जो जीना सिखाए॥

गुरु वह नहीं जो अपनी छाया,
शिष्य के सिर पर रखता जाए।
गुरु वह है जो पंख सँवारे,
और खुला आकाश दिखाए॥

शिष्य अगर गुरु से आगे हो,
गुरु क्यों उसको हार बताए?
जिस दिन शिष्य शिखर छू लेता,
गुरु उस दिन ऊँचा हो जाए॥

ग्रंथ बदलें, युग भी बदलें,
गुरु की महिमा कौन भुलाए।
ज्ञान वही जो राह बनाए,
गुरु वही जो जीना सिखाए॥
— संतोष कुमार शर्मा
 
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एक घंटा पहले

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