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गीत अगीत

                
                                                         
                            घूम - फिर कर लौट आया
                                                                 
                            
आदमी को देख आया
ज़िन्दगी की महक पाई
मौत ने अपनी सुनाई
क्या संजोया क्या गंवाया
मैं तुम्हारा गीत मुझको तुम नहीं पहचान पाए
याद रखने को तो शायद याद रख तुम ख़ूब पाए
दिल दिवाना गुनगुनाया
आज कुछ कहना है तुमसे
आज मैं चुप हो रहा हूं
कल तुम्हारे रास्तों से
अपनी मंज़िल खो रहा हूं
आप का रुख़ ख़ूब भाया
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8 घंटे पहले

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