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एक पिता अपनी किस्मत को मिट्टी में था ढूंढ रहा

                
                                                         
                            मिला जाये उसके बच्चों को सब कुछ यही आशा में घुम रहा
                                                                 
                            
उसके मन में उठा सवाल क्यों ना अपने बच्चों को पढ़ाओ

जो ना पाया मैंने मुकाम वो अपने बच्चों को दिलाओ
हालात से होकर परेशान वो लगने लगा बुहार क्यूं है ऐसा
भाग्य हमारा, दुख मुसीबत और लाचारी यही है क्या अंजाम हमारा

मेहनत संघर्ष के चलते उसका आधा जीवन बीत गया
अपने लिए ना कुछ मांगा बस बच्चों की जरूरत को पूरा किया

यही था एक पिता जो हर बच्चे को ईश्वर ने वरदान दिया
एक पिता अपनी किस्मत को मिट्टी में था ढूंढ रहा
- पूजा
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एक दिन पहले

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