चाँद छुपकर बादलों में, बेमिसाल रह गया,
तेरी यादों का मेरे दिल में ख़याल रह गया।
पास दिखते थे सितारे, फ़ासला फिर भी रहा,
उनकी दूरी देखकर दिल में सवाल रह गया।
चाँदनी तो पास थी, चाँद मगर मिलता नहीं,
मेरे हिस्से में तेरा ही मलाल रह गया।
रात भर सोचा कि चाँद से बात कर लूँ,
लब तक आकर हर दफ़ा बस सवाल रह गया।
चाँद भी ख़ामोश था, मैं भी कुछ कहता न था,
रात की तन्हाइयों में एक कमाल रह गया।
सुबह से कहता रहा, उसको मेरे पास ला,
मेरी हर इक आरज़ू में तेरा ख़याल रह गया।
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