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भारत — हर मिट्टी की अलग कहानी

                
                                                         
                            भारत — हर मिट्टी की अलग कहानी
                                                                 
                            

कश्मीर की वादी मुस्काए,
डल झील मधुर तराने गाए।
लद्दाख़ के हिम-शिखरों पर,
नीला अम्बर शीश झुकाए॥

हिमाचल के देवदार महकें,
बर्फ़ीली राहें गीत सुनाएँ।
उत्तराखंड में गंगा उतरकर,
हर की पौड़ी दीप जलाएँ॥

स्वर्ण-मंदिर पंजाब में चमके,
सेवा की पहचान पुरानी।
वाघा पर जब ध्वज लहराए,
सीना बोले वीर कहानी॥

पर्वत, नदियाँ, धाम अलग हैं,
सबकी अपनी शान पुरानी।
हर मिट्टी की अलग कहानी,
मिलकर बनती भारत-वाणी॥

दिल्ली का लाल किला बोले,
बीती सदियाँ पास बुलाएँ।
इंडिया गेट की अमर-ज्योति,
वीरों की गाथाएँ गाएँ॥

ताजमहल को चाँद छुए तो,
पत्थर प्रेम की बात सुनाए।
काशी के घाटों की आरती,
जीवन का विस्तार बताए॥

आमेर का दुर्ग शान से बोले,
हल्दीघाटी वीर कहानी।
थार की रेत सुनहरी होकर,
गाए मरुधर शान पुरानी॥

प्रेम कहीं, बलिदान कहीं है,
शौर्य लिखे अपनी ज़ुबानी।
हर मिट्टी की अलग कहानी,
मिलकर बनती भारत-वाणी॥

कच्छ की उजली धरती चमके,
गिर का सिंह दहाड़ सुनाए।
सोमनाथ की अडिग कहानी,
टूटकर फिर उठना सिखाए॥

साँची की नीरवता बोले,
खजुराहो का शिल्प लुभाए।
भीमबेटका की चट्टानों में,
आदिम युग के रंग दिखाए॥

अजंता की दीवारें बोलें,
एलोरा पत्थर में गाए।
मुंबई का गेटवे सागर से,
दूर-दूर के दिल मिलवाए॥

पत्थर में भी साँसें बसतीं,
सदियों की यादें हैं पुरानी।
हर मिट्टी की अलग कहानी,
मिलकर बनती भारत-वाणी॥

बोधगया की छाँव तले मन,
अपने भीतर राह बनाए।
नालंदा के मौन खंडहर,
ज्ञान की ज्योति फिर जगाएँ॥

हुगली की लहरों के तट पर,
विक्टोरिया इतिहास सजाए।
सुंदरबन की गहरी साँसें,
वन का अपना राज़ बताएँ॥

कोणार्क का सूरज पत्थर में,
समय-चक्र का भेद बताए।
जगन्नाथ का रथ जब निकले,
जन-सागर ही राह बनाए॥

ज्ञान, प्रकृति और आस्था की,
बहती जाए एक रवानी।
हर मिट्टी की अलग कहानी,
मिलकर बनती भारत-वाणी॥

ब्रह्मपुत्र की बाँहें फैलें,
काज़ीरंगा शान बढ़ाए।
सिक्किम की कंचनजंघा पर,
भोर सुनहरा ताज सजाए॥

मेघालय के जीवित सेतु,
कुदरत का विज्ञान बताएँ।
अरुणाचल की पहली किरणें,
भारत का अभिनंदन गाएँ॥

नागा पर्वत, मणिपुर घाटी,
मिज़ोरम के वन लहराएँ।
त्रिपुरा के नीरमहल में,
जल भी अपना रूप सजाए॥

दूर भले हों राहें इनकी,
दिल की धड़कन एक सुहानी।
हर मिट्टी की अलग कहानी,
मिलकर बनती भारत-वाणी॥

चारमीनार खड़ा सदियों से,
हैदराबाद की शान बताए।
आंध्र में तिरुपति की घंटी,
मन में श्रद्धा-ज्योत जगाए॥

हम्पी के खामोश पत्थर भी,
विजयनगर की गाथा गाएँ।
मैसूर का महल रात ढले तो,
तारों को धरती पर लाएँ॥

महाबलीपुरम के पत्थर,
सागर से संवाद रचाएँ।
केरल के शांत बैकवॉटर,
नारियल की छाँव सजाएँ॥

दक्षिण की हर छवि निराली,
कला-संस्कृति शान पुरानी।
हर मिट्टी की अलग कहानी,
मिलकर बनती भारत-वाणी॥

ताज अकेला भारत कब है,
हिमालय ही पहचान नहीं।
मंदिर, मस्जिद, किले ही केवल,
भारत की बस शान नहीं॥

भारत उस कारीगर में बसता,
जिसने पत्थर रूप बनाया।
भारत उस सैनिक में बसता,
जिसने सीमा-धर्म निभाया॥

भारत उस किसान में बसता,
जिसने धरती अन्न उगाया।
भारत उस माँ की लोरी में,
जिसने प्रेम का पाठ पढ़ाया॥

नाम अलग हों, रूप अलग हों,
दिल की लेकिन प्रीत पुरानी।
हर मिट्टी की अलग कहानी,
मिलकर बनती भारत-वाणी॥
— संतोष कुमार शर्मा
 
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3 घंटे पहले

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