सरकार बड़ी बेख़बरी है
ये सरकार बड़ी बेख़बरी है,
ये गूंगी और फिर बहरी है।
इन हाकिमों की नींद तो देखो,
कितनी ज़्यादा गहरी है!
इनके चेहरे से साफ़ झलकता है,
कि सरकार कितनी डरी है,
ये सरकार बड़ी बेख़बरी है।
हम लोकतंत्र के प्रहरी हैं,
क्रांति की मशाल हाथ में लेकर,
लिखेंगे इतिहास जो सुनहरी है,
ये सरकार बड़ी बेख़बरी है।
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