आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

ये सरकार बड़ी बेख़बरी है।

                
                                                         
                             सरकार बड़ी बेख़बरी है
                                                                 
                            
ये सरकार बड़ी बेख़बरी है,
ये गूंगी और फिर बहरी है।
इन हाकिमों की नींद तो देखो,
कितनी ज़्यादा गहरी है!
इनके चेहरे से साफ़ झलकता है,
कि सरकार कितनी डरी है,
ये सरकार बड़ी बेख़बरी है।
हम लोकतंत्र के प्रहरी हैं,
क्रांति की मशाल हाथ में लेकर,
लिखेंगे इतिहास जो सुनहरी है,
ये सरकार बड़ी बेख़बरी है।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर