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देश के जवान

                
                                                         
                            जिनकी वजह से हम चैन की नींद सो पाते हैं,
                                                                 
                            
सिर्फ हमारे लिए वो अपने घर परिवारों से दूर हो जाते हैं।
देश की रक्षा को वो अपना पहला कर्तव्य बताते हैं,
छू कर धरती मां को, वे जंग में उतर जाते हैं।
मौत को भी वे हस -हस कर गले लगते हैं,
छोड़ कर अपने परिवार को अकेला वे बस वहीं रम जाते हैं।।
की आता न उनका जिस्म तक उस घर मे,
जहां वो बचपन से बड़े होते हैं,
छोड़ कर अपनी मां का आंचल न जाने वो कहा खो जाते हैं।
रोता है उनका बाप भी उन्हें तिरंगे में लिपटा देख कर,,
1,2 मंत्री को अपने पास देख कर ,,
की मेरा लाल मुझे लादों, जितना दिया था उतना ही लादों।।
या आखिरी बार देख लेने दो मुझे उसे वहां जहां वो शांति से लेटा है।।
बिल्कुल शांत,मेरा लाल ,वो आखरी शब्द थे उनके बाप के।
माथा चूम के उन्होंने उसे विदा किया ।।
फक्र है मुझे भाई ,,उसकी बहन न हिम्मत दिखाई थी।।
पंच तत्व में लीन हुआ वो जवान ये उसकी आखिरी लड़ाई थी।
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3 महीने पहले

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