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कई ख़्वाब अधूरे छोड़ कर

                
                                                         
                            कोई दूर जैसे कहकशा
                                                                 
                            
कई रंगतों से गुलसिता
कोई चेहरा पुरनूर सा
कोई कीमती कोहिनूर सा
न मिला मुझे किसी मोर पर
कई ख़्वाब अधूरे छोड़ कर

फिर याद कर वो समा
या कुर्बतो का वो जहाँ
जहाँ तुम और हम मिले
और था यादों का कारवां
अब क्या गिला किसी तौर पर
कई ख़्वाब अधूरे छोड़ कर

करूँ तुमसे मैं क्या गिला
ख़त्म करो ये सिलसिला
क्या हुआ ये क्यों हुआ
न दो किसी को बद्दुआ
क्यों गया वो दिल मेरा तोड़ कर
कई ख़्वाब अधूरे छोड़ कर
-निकहत आरफ़ा
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एक घंटा पहले

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