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अब शस्त्र उठाना होगा

                
                                                         
                            इन्तहा हो चुकी ज़ुल्म की, अब हर पापी को मिट जाना होगा,
                                                                 
                            
मेंहदी वाले हाथों को भी, अब शस्त्र उठाना होगा ॥

रोने - धोने, मोमबत्तियाँ जलाने से अब कुछ न होगा,
हवस के अंधों को "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता " का पाठ पढ़ाने से अब कुछ न होगा,
मानवता दम तोड़ चुकी, अब तुमको भी दानव बन जाना होगा,
सम्मान सुरक्षित रखने को, अब हर नारी को रणचण्डी बन जाना होगा ।।

इन्तहा हो चुकी ज़ुल्म की अब हर पापी को मिट जाना होगा,
मेंहदी वाले हाथों को भी अब शस्त्र उठाना होगा।।

हर अबला को अब सबला बन जाना होगा,
हर बार न आएंगे कृष्ण बचाने, आँचल अपना खुद ही बचाना होगा,
पुलिस, प्रशासन, ये नेता, ये सरकारें, सब भीष्म बने हैं,
दुःशासनों को सबक सिखाना है तो खुद ही सुदर्शन चक्र चलाना होगा ॥

इन्तहा हो चुकी जुल्म की,अब हर पापी को मिट जाना होगा,,
मेंहदी वाले हाथों को भी अब शस्त्र उठाना होगा।।

ये कलयुग है, जंगल जिस्मफरोशों का, तुम्हें खुद अपना आप बचाना होगा,, रक्षक बन गये भक्षक, अब तुम्हें खुद प्रहरी बन जाना रोगा,
और तेरी करुण पुकार सुन, क्या देव, क्या मानव, सब हुए लाचार हैं,
अब महिषासुर के मर्दन को, तुम्हें खुद दुर्गा बन जाना होगा।

इन्तहा के चुकी जुल्म की ,अब हर पापी को मिट जाना होगा, मेंहदी वाले हाथों को भी अब शस्त्र उठाना होगा।।
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53 मिनट पहले

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