बहुत हुआ आतंक, अब तो हल निकलना चाहिए।
हिमालय की वादियों से, भीषण रण निकलना चाहिए
रक्त रंजित कर दिया , जम्मू और काश्मीर को
विजय का सूरज, आज नहीं तो कल निकलना चाहिए।।
खो दिए हमने हजारों, सैनिक हिमालय की गोद में।
कौन कहता सैन्य जीवन, बीतता है मौज में
हर दिवस नई चुनौतियां, मौसम की भी मार है
लेके लश्कर है निकलते, आतंकियों की खोज में।।
अब आतंकियों की सारी हेकड़ी, और बल निकलना चाहिए।
सीमा पार के आतंक का तस्कर पकड़ना चाहिए
सरगनाओं के कैंप, और आबुध भंडार पर
दो चार ब्रह्मोश मिसाइल का धमाका गर्जना चाहिए।।
सिर्फ़ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।
कश्मीर की वादियों में फिर से शांति और सौहार्द हो
सेना और सरकार को कोशिश तेज करनी चाहिए।।
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