यूं चले हम मुस्कुरा के जैसे हमने अपनी हस्ती सजाई हो,
पता है ऊपर वाले को की हमने अपनी अस्थि सजाई है है,
यूं ना दुखी हो गमों से यही तो तेरे अपने हैं,
बाजारों से खरीद के हमने भी खुशियां लाई है।
ना कर इंतजार की अपने आएंगे,
हमने भी रिश्तों में कभी गर्मी ना पाई है।
करते थे इंतजार जिनका,उनके लिए हम गैर हो गए,
अब सबके रिश्ते सिर्फ नाम के रह गए।
ना रही वह बुआ, ना रही वह मामी, ना रहा कोई रिश्ता,
सब तार -तार हो गए, अब रहा सिर्फ नाम का वह मेला
जो स्टेटस पर दिखता है, व्हाट्सएप के एक ब्लूटूथ पर सबका मन फिसलता है,
अब न पूछते सब की हाल कैसा है,
बस फेसबुक पर निहार कर सबका मन तरसता है,
क्या खाया क्या पहने या देख के कुंठा पाले हैं,
ना रह गई पूछने की रीति,की कैसे आप अकेले खुद को संभाले हो,
झूठे रिश्ते नाते मैने देखे है,
अब सब रिश्तो ने अपने महफिलों में सिर्फ गैरों को समेटे हैं,
ना करना इंतजार,एक दिन ना कोई तेरा अपना आएगा,
ना दादी ,ना नानी कहकर तुम्हें बुलाएगा।
आएगा वह दिन भी जब तुम भी अकेले बैठोगे, जब सोच कर तुम भी अपने भाग्य को कोसोगे।
मांगने पर भी तुम्हें कोई पानी तक ना पूछेगा,
ना आएगा कोई मिलने ,जब तुम्हारा यह शरीर टूटेगा।
काम ना आएगी या दुनिया जिसमें, तू आज खोया है,
ना आएंगे काम वो लोग जिसे तूने अपने सपने सजोया हैं,
ना आएंगे काम फेसबुक के फॉलोअर्स यह तो रील कि दुनिया है,
रह जाओगे तुम बिल्कुल अकेले, तरसेगी आंखें अपनों को देखने के लिए,
मत डुबो तुम इतने अभियान के घने अंधकार में,
गैरों की बारात में नाचने वाले , वह गैर तेरे अंत में काम न आएंगे ,
आखिर में तेरे अपने ही आएंगे काम तेरे तेरवीं के काम में।
-रश्मि
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