आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

व्यवहार उनसे तरल रहा

                
                                                         
                            प्रश्न बेशक कठिन पर उत्तर मेरा सरल रहा।
                                                                 
                            
व्यवहार ना जाने क्यों उनसे मेरा तरल रहा।।

मन में कुछ मगर जुबान पर रखे कुछ और।
देख रही उनका नजरिया पल-पल बदल रहा।।

लिव इन रिलेशनशिप रहने की मज़बूरी कैसी।
उनके तर्क-वितर्क में कहीं न कहीं छल रहा।।

शिक्षित और विकसित सोच का परिणाम यही।
जिम्मेदारी से बचते मर्द स्त्री का पैर फ़िसल रहा।।

अकेलापन दूर करने के विकल्प और 'उपदेश'।
अपना होकर इंसान अपनों से नही संभल रहा।।

मर न जाएं रिश्ते उम्र के साथ नसीहत मिलती।
तरसेगे अपना कहने को सच्चा ज्ञान प्रबल रहा।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर