थमी धड़कनों को जिंदा करने की ताकत उसमें।
मोहब्बतें आशिकी में सैर करने की हिम्मत उसमें।।
दिल के अन्दर में दबा लेती आँसू पी कर जी लेती।
ख्वाबों में गीत संगीत कर हँसाने की आदत उसमें।।
सैर-सपाटा नाकाफी अपनी खुशबू की मदहोशी मे।
जन्नत का लुत्फ लेती काबिले तारीफ जुर्रत उसमें।।
अपने बस का आंकलन जो कर सकती कर लेती।
सच्चाई से ना डिगने वाली बेशुमार दौलत उसमें।।
साज-श्रृंगार दूर की कौड़ी शिक्षा की धनी 'उपदेश'।
आईना से रूबरू होकर निहारने की आदत उसमें।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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