आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

गलतफहमी से बचें कैसे मशविरा भी क्या करे।।

                
                                                         
                            किस पर यकीन करें उम्मीद किस पर रखे।
                                                                 
                            
जुबान से सच्चे नही एतबार उनका क्या रखे।।

मशविरा देने वाले रास्ता बदल लेते देखकर।
मदद की गुंजाइश पर भरोसा उनका क्या रखे।।

रिश्ता यकीनन मजबूत लग रहा था उनका।
शायद उम्र दखल दे गई संग उनका क्या करे।।

बच्चे बड़े होने लगे सवाल जवाब चाहते होंगे।
तर्क-वितर्क से बचें उनकी बुद्धि का क्या करे।।

घर परिवार की जिम्मेदारियां 'उपदेश' निभानी।
गलतफहमी से बचें कैसे मशविरा भी क्या करे।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर