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हिम्मत होती नही फिर क्यों याद करती।।

                
                                                         
                            तेरे ख्याल से आँखें नम जैसी लगती।
                                                                 
                            
कुछ कहना नही चाहती उबासी भरती।।

कुछ-कुछ मलाल अपने ऊपर आता।
दिल के सुझाए समाधान बर्बाद करती।।

हाँ कहूँ कि ना कशमकश में प़ड गई।
हिम्मत होती नही फिर क्यों याद करती।।

जबाव मिले-जुले से उथल-पुथल करते।
हकीकत में बेहतर तरकीब इज़ाद करती।।

कभी-कभी सोचती रात में जरूरत पर।
सतरंगे ख्यालों के बीच में जिहाद करती।।

गर्दिशों के दिन खुद मैंने बनाए 'उपदेश'।
बादलों को देखकर बस फ़रियाद करती।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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35 मिनट पहले

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