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तन्हाई कचोटती

                
                                                         
                            मेरा हमसफर रहते हुए, तन्हाई कचोटती।
                                                                 
                            
पुराने दिनों की याद कर, खुद को कोसती।

चार सहेलियाँ बैठकर, अपनी-अपनी कहें।
असलियत में सभी, खुद की पोल खोलती।

अपनी इज्जत अपने हाथ, कहते 'उपदेश'।
जिन्दगी बहुत लम्बी, जुम्मेदारियाँ बोलती।

उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद
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4 वर्ष पहले

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