सुख और दुख के मौसम सब के अपने अपने।
माफ़िक लगने वाले सुनाते कितने प्यासे सपने।।
न जाने कौन होते हैं जो बाजू थाम लेते आकर।
मुसीबत में सहारा देने वाले ही लगे मुँह बचाने।।
उदासी जिसके दिल में हो उसी की नींद उड़ती।
फिर भी अपनी आँखों से लगे क्यों तुम चिढ़ाने।।
खून में हीमोग्लोबिन की कमी से चिड़चिड़ा हूँ।
साँस चलती मगर कोई आता नही दिल लगाने।।
मोहब्बत के सफर में मिलकर विचारो 'उपदेश'।
अकेले सोचने से मसला सुलझता ही नही दीवाने।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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