तुम सामने नही तुम्हारी लाइनों में खोजता।
बेचैन मन स्मृति के सहारे आगे पीछे लोटता।।
झिररियो के सहारे पुराने वायदे याद दिलाते।
उनकी ज़रूरत नही फिर भी उन्हीं में लोटता।।
सच्चाई की खुशबू की महक दूर तक फैली।
चतुराई काम आती नहीं उसी कीचड़ में लोटता।।
हर चाल के पीछे झलकती उसकी मजबूरियाँ।
दिल न दुख जाए ऐसा व्यक्तित्व उसे कचोटता।।
बदलते व्यवहार में रिश्ते को निभाता 'उपदेश'।
कौन अपना कौन पराया समझदारी में लोटता।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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