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सबक मालूम

                
                                                         
                            बदल जाता है सारा मंजर जरा सा मुस्कराने से।
                                                                 
                            
खुशी का आलम आ जाता उसके पास आने से।।

हकीकत देख बहुत सारे जलने वाले बढ़ जाते।
दूरियाँ घटती देखी गई मौके पर गले लगाने से।।

अगर सबक मालूम होता तो इंतजार ना करते।
वक्त रहते बांट लेते हम मोहब्बत के ख़ज़ाने से।।

पुरानी बाते याद आती मगर मजबूर दिल से मैं।
जज्बात जोर मारने लगे 'उपदेश' ठहर जाने से।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद
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10 घंटे पहले

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