आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

कुप्रथाओं का शिकार ज्यादातर समाज है।

                
                                                         
                            बेटे ने जब बाते नही मानी तो छोड़ दिया।
                                                                 
                            
मगर दामाद का क्या 'उपदेश' तर्क दिया।।

माँ के लिए बेटी हमेशा से करीब ही रही।
बहू को ताने के साथ 'उपदेश' वितर्क दिया।।

रिश्तों की लीला 'उपदेश' अपरम्पार यहाँ।
इन्हीं ने इंसान को सुख और दुख-दर्द दिया।।

कुप्रथाओं का शिकार ज्यादातर समाज है।
नैनो से देखो 'उपदेश' पाखण्ड ने क्या दिया।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर