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जितना भी वक्त जिया 'उपदेश' किये पैसे वसूल।।

                
                                                         
                            उनकी परवाह को मोहब्बत समझने की भूल।
                                                                 
                            
खुशी के साथ अपने-आप बन गई याद सूल।।

मासूम दिल हरकते करने लगा अपना मान कर।
कच्ची उम्र के प्रेम से ही बनते मजबूत उसूल।।

उसी के साथ दुनिया में रहने की तमन्ना जागी।
महसूस लगने लगे विद्रोही रिश्तेदार ऊलजलूल।।

प्रेम अक्सर आजमाइश नही करता सिर्फ जीता।
अपनी खुशी समझ आने पर गैर पैरों की धूल।।

मोहब्बत अनमोल होती एहसास होता जन्नत का।
जितना भी वक्त जिया 'उपदेश' किये पैसे वसूल।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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एक घंटा पहले

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