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दोस्त यार है वही मगर मुलाकातें नही होती।

                
                                                         
                            जगह बदलने भर से क्या कुछ बदल गया।
                                                                 
                            
मत भेद अपनों में बढ़े उनका ख्याल गया।।

उन्हीं से दूरी बढ़ी जिनके लिए कमाना था।
ख्वाब साकार होने लगे तो दिल बहल गया।।

फोन करने की जरूरत अब लगती नही हमे।
उनके फोन आने से थोड़ा दिल पिघल गया।।

दोस्त यार है वही मगर मुलाकातें नही होती।
मन तो करता है मगर ज़माना ही बदल गया।।

पैसों की अहमियत की वज़ह से सौदा किया।
पैसा बखूबी आया 'उपदेश' जीवन ढल गया।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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42 मिनट पहले

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