आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

नींद आने से पहले याद आई

                
                                                         
                            यों नींद आने से पहले याद आई।
                                                                 
                            
बेकरारी की जिसने तादाद बढ़ाई।।

संदेश व्हाटसएप पर लिख डाला।
वापस उसकी आमोद-प्रमोद आई।।

अब इशारे कहाँ समझ पाते लोग।
कॉल करके विस्तृत मुराद समझाई।।

अल्फाजों का सहारा भारी प़डा।
जान बच नही पाई विवाद गहराई।।

जो दौर चल रहा है मुद्दा वो नही।
बदलते वक्त की जद्दोजहद जताई।।

वैसे तो सभी है तलाश-ए-सुकून में।
सच्ची शौहरत 'उपदेश' स्वाद लाई।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर