उबलने पानी जैसे तानों ने 'उपदेश'
मेरा दिल अंडा जैसा सख़्त कर दिया
इससे ज्यादा और क्या मिला तुमसे
तुम्हारे साथ ने मुझे नाशाद कर दिया
कितने ख्वाब सजाए थे बचपन में
कुछ पूरे हुए कुछ ने नाबाद कर दिया
नारी जन्म से मृत्यु तक आश्रित रहीं
मृत्यु ने आकर मुझे आजाद कर दिया
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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