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कसक समाई है 'उपदेश' के आह भरते रहते

                
                                                         
                            कुछ लोग अकेले रहकर भी नही थकते।
                                                                 
                            
वो क्या समझेंगे जो अक्सर भीड़ में रहते।।

जिंदगी को मौन की ओर ले जाती तन्हाई।
ज्यादातर ऐसे लोग मोहब्बत के साथ रहते।।

अपनेपन की चाहत किसी को नही होती।
अपनेपन दूर करने को लोग दर-दर भटकते।।

दिखावा करने वाले पहचाने जाते भीड़ में।
कसक समाई है 'उपदेश' के आह भरते रहते।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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24 minutes ago

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