आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मैं जो चाहूँ तो मुलाकात हो सकती

                
                                                         
                            मैं जो चाहूँ तो मुलाकात हो सकती।
                                                                 
                            
करना चाहूँ बात तो बात हो सकती।।

उनकी निगाह के आगे उजाला बहुत।
उनके साथ अँधेरे की मात हो सकती।।

हैरानी की कोई बात नही खामोशी है।
मोहब्बत में छुअन से रात हो सकती।।

शांत बैठूं तो लगता जैसे वो झाँकती।।
अंतरात्मा में भी खुराफात हो सकती।।

पहले लम्हे के जज्बात उफान मारते।
आती याद 'उपदेश' शान्त हो सकती।।

ऐसे इश्क का अंजाम मददगार होता।
दूर रहने पर कशिश इज़ाद हो सकती।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर