मैं जो चाहूँ तो मुलाकात हो सकती।
करना चाहूँ बात तो बात हो सकती।।
उनकी निगाह के आगे उजाला बहुत।
उनके साथ अँधेरे की मात हो सकती।।
हैरानी की कोई बात नही खामोशी है।
मोहब्बत में छुअन से रात हो सकती।।
शांत बैठूं तो लगता जैसे वो झाँकती।।
अंतरात्मा में भी खुराफात हो सकती।।
पहले लम्हे के जज्बात उफान मारते।
आती याद 'उपदेश' शान्त हो सकती।।
ऐसे इश्क का अंजाम मददगार होता।
दूर रहने पर कशिश इज़ाद हो सकती।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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