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कोरे कागज सा दिल अब नही जाने मन

                
                                                         
                            कोरे कागज सा दिल अब नही जाने मन।
                                                                 
                            
उम्मीद की रंगोली बनाई मिटाना न सनम।।

यादों की रेखाएँ लम्बी और गहरी हो गई।
खुशियो की बगिया तुम्हारे हाथ में सनम।।

प्यार की भाषा में गीत संगीत तुम्हारे साथ।
स्वर में स्वर मिलाना लम्हा सजाना सनम।।

एक किस्सा मेरी कहानी का तुम्हारे साथ।
निशानी की कतार व्यावहारिक रहे सनम।।

विरह की धूप अब सह न पाऊँगी 'उपदेश'।
मिन्नतें कर रही सहयोग छोड़ना नही सनम।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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एक घंटा पहले

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