ख्याल छोटा था मन भरमाया था।
बेशक उसने तुझसे मिलवाया था।।
तभी से दिल चहकने लगा खुलकर।
कोई न जान सका क्या पिलाया था।।
सामने आते ही कपकपाने लगे होंठ।
किसने उँगली लबों पर लगाया था।।
फिर तमाम दिन मेरा दम घुटता रहा।
किस तरह धुन्ध ने बादल बनाया था।।
मेरा सबक शायद तुम्हें पसन्द आए।
यों प्यारा सबक 'उपदेश' पढ़ाया था।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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