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जुबाँ की जंग से प्रदूषित

                
                                                         
                            जुबाँ की जंग से प्रदूषित हो रहा घर।
                                                                 
                            
कौन जीता कौन हारा मसला प्रखर।।

भ्रम टूटेगा कभी या पहले हम टूटेगे।
रिश्तों पर शायद पड़ेगा गहरा असर।।

धुँधलाने लगेंगी प्यार की निशानियाँ।
रिश्ते खुद-ब-खुद मरने लगेंगे बेअसर।।

सपनों की फ़ेहरिस्त की किस्त बाकी।
सफर गुजर जाएगा हिसाब के बगैर।।

मोहब्बत होगी तो रूह तक पहुँचेगी।
एहसास है 'उपदेश' दिलों को लेकर।।

इश्क मुकम्मल कभी होता नही यारो।
ग़मगीन निगाहें मतलब से है बेख़बर।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश
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5 घंटे पहले

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