आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

शिकायतों की किताब बन्द की 'उपदेश' ने।

                
                                                         
                            मुश्किलों को जिसने हमसफ़र बना लिया।
                                                                 
                            
अँधेरों के साथ अपना जीवन सजा लिया।।

इरादे हार मानते ही नही गुमसुम रहे मंसूबे।
वक्त की दिशा में कदम खुद ने उठा लिया।।

तूँ नही कर पाएगा जब दुनिया कहने लगी।
बस चलते रहो धैर्य से मन में बिठा लिया।।

हर रोज़ नई नई साज़िशें कुछ न बिगाड़ेगी।
सोने से पहले संकल्प मजबूत बना लिया।।

शिकायतों की किताब बन्द की 'उपदेश' ने।
ख्वाबों में सही दुश्मनी को मुँह चिढ़ा लिया।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
16 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर