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धड़कनो को जुबान नही होता।।

                
                                                         
                            जब तक तजुर्बा नही होता।
                                                                 
                            
सुनने पर यकीन नही होता।।

गुजरे हुए लम्हों में तुम रही।
अब तुम्हारा मन नही होता।।

अधूरेपन से पोषित हो रही।
आशिकी में जमीं नही होता।।

जिन्दगी का मायाजाल रहेगा।
आज घरों में आँगन नही होता।।

इश्क तो बस हसरतो में रहा।
धड़कनो को जुबान नही होता।।

अन्दर आग सुलगती 'उपदेश'।
ऐसे धुएँ में अमन नही होता।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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3 घंटे पहले

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