जवानी के मुहाने पर आकर
मिलन की एक चाह जागी
जो अंतर्मन को ठंडक पहुँचाए
बदलते मौसम में आह जागी
आकर गले लगा लो कसकर
गर्दन की अंगड़ाई मिटाने वाला
मेरे बालों की खुशबू लेकर
भीतर की बेचैनी दूर करने वाला
मेरी इच्छा पूरी करने वाला
व्रत रखी उसका हो रख वाला
घर वालों की इज़्ज़त रखे 'उपदेश'
प्रेम करे भरपूर दे एक निवाला
जो धीरे-धीरे भीतर उतरे
सिहरन भर कर खोले ताला
मस्त करे मस्ती में डूबकर
ईश्वर भेजना ऐसा मतवाला
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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